आसरा इस जहाँ का

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

आसरा इस जहाँ का मिले ना मिले

मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए

चाँद तारे फलाफ पर दिखे ना दिखे

मुझको तेरा नज़ारा सदा चाहिए

यहाँ खुशियां हैं काम और ज़्यादा हैं ग़म

जहाँ देखो वहीँ पर भरम ही भरम

मेरी महफ़िल में शम्मा जले ना जले

मेरे दिल में उजाला तेरा चाहिए

मेरी धीमी है चाल और पथ है विशाल

हर कदम पर मुसीबत है अब तो संभाल

मेरी चाहत की दुनिया बसे ना बसे

मेरे दिल में बसेरा तेरा चाहिए

कभी वैराग है कभी अनुराग है

यहाँ बदलते हैं माली वही बाग़ है

पेअर मेरे थके ये चले ना चले

मुझको तेरा इशारा सदा चाहिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।