निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे,

बंसी बजा के किशन कन्हैया मुझको सुला रे

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे।।

लोरी गाकर मैया यशोदा तुझको रोज सुलाती है,

तेरी निंदिया की ख़ातिर तो परियां उतर कर आती,

कोई नहीं है कृष्णा हमारे निंदिया ना आए नैनों के द्वारे,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे।।

चंदा मामा दूध कटोरी तेरे लिए भर लाते हैं,

गोद में लेकर तुझे कन्हैया तारों में ले जाते हैं,

बैठी भरोसे मैं हूँ तुम्हारे निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे,

बंसी बजा के किशन कन्हैया मुझको सुला दे,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे।।

इधर मैं जागूँ उधर तू सोए कैसी रीत तुम्हारी है,

मुझे बता दे श्याम सलौने कैसी प्रीत तुम्हारी है,

बैठी भरोसे मैं हूँ तुम्हारे निंदिया ना आए नैनों के द्वारे,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे निन्दियाँ ना आए,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे।।

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे,

बंसी बजा के किशन कन्हैया मुझको सुला दे,

छुप गई चंदनियाँ खो गए तारे,

निन्दियाँ ना आए नैनों के द्वारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।