तेरा शेर मेरे घर आया

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पंच कंजका दे बाद नि माये पेहला लेंकड़ा पाया

तेरा शेर मेरे घर आया

हर वारी मैं रखा नवराते माँ हर वारी कंजका बिठावा

सचे मुह नाल करा आरती माँ तेनु भोग लगावा

मेरे उते होगी माता तेरे छतर छाया

तेरा शेर मेरे घर आया

दुनिया दे हर मंदिर दे विच माँ जाके तरले पाए,

दान दक्षना तिरकी ते कीने ठेडे खाए

तेरे पवन तो मिलिया मुरादा तू एह बूटा लाया

तेरा शेर मेरे घर आया

दया दी दृष्टि मेरे उते किती मेहरा वाली

इस बछड़े नु तत्ती हवा न लगे करी रखवाली

अंधारे विच महारानी ने प्यारा दीप जलाया

तेरा शेर मेरे घर आया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।