जी करदा मेरा दातिये नच नच ख़ुशी मनावा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जी करदा मेरा दातिये नाच नाच ख़ुशी मनावा॥

पैरा विच पैरा विच पाके घुंगरू मैं जोगन बन जावा॥

मस्सा मस्सा भागा वाली रात आज आईऐ

कोई मेरी सुख जो कीती महा मैय ऐ

क्यों ना अपने नाल में सब नु आज नचावा,

पैरा विच पैरा विच पाके घुंगरू.......

वेहड़े विच आज मेरे वजिया शेहनाइया ने

बार बार संगता दिंदिया वधाईआ ने

वेख के लगिया रोनका दिल दिया भी गावा

पैरा विच पैरा विच पाके घुंगरू.......

शेरा वाली आप अई घर मेरे चल के,

मैं ता मजबूर वी ना करा रजके,

क्यों ना अपने नाल में सब नु आज नचावा,

पैरा विच पैरा विच पाके घुंगरू.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।