मैं गिनता रहू गुण तेरे तू अवगुण गिन मेरे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैं गिनता रहू गुण तेरे तू अवगुण गिन मेरे

मुझे अपना दिखे न कोई भवानी माँ बिन तेरे

धोये है पाप तूने लाखो के मैया मेरा भी चोला अब साफ़ कर दे,

गलती की पुतले बड़े तूने बक्शे बुले भी मेरी अब माफ़ करदे

एसी ज्योति जला दो मन में के भाग जाए अँधेरे

मुझे अपना दिखे न कोई भवानी माँ बिन तेरे

माँ केह के भेरो बली था जब रोया

उसको अमर होने का वर दिया

बुल गई पल में गुन्हा उसके सारे

तुमने बुरे का भला कर दियां

हुई ममता दयाल जब तेरी तो तार दिए बहु तेरे

मुझे अपना दिखे न कोई भवानी माँ बिन तेरे

कपूत चाहे हो जग में माता कु माता कभी न हुई

चरणों में जिस ने सिर को जुकाया

उस के घर माँ की मेहर हुई इस उम्मीद में दर तेरे लगाये जाऊ माँ फेरे

मुझे अपना दिखे न कोई भवानी माँ बिन तेरे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।