जागो भोले नाथ सुनो अरज हमारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जागो भोले नाथ सुनो अरज हमारी

रक्षा करो हमारी जटा जुट गंग धरी

दबी जा रही है पापो से डरती माँ बेचारी

नेत्र तीसरा खोलो अब तो महाकाल त्रिपुरारी

राज अधर्मी करते जग पे निर्धन तेरे पुजारी

जागो भोले नाथ सुनो अरज हमारी

विश्वनाथ अपनी करुणा का अमृत हमें पीला दो

अपने श्री चरणों में हे सर्वेश्वर हमें जगा दो

काम क्रोध के जाल में उलझे है ये दुनिया सारी

जागो भोले नाथ सुनो अरज हमारी

भगीरथ के पुरखो का उद्धार किया था

लाकर गंगा स्वर्ग से तुमने जीवन दान दिया था

दूर हमारी चिंता कर दो दुःख भये भंजन हारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।