ऐसी पिलाई साकी कुर्बान हो चुके हम

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऐसी पिलाई साकी, कुर्बान हो चुके हम

अब तक रहे जो बाकी, अरमान खो चुके हम

करते हो दिल्लगी तुम, अव्वल बनाके पागल

कूचे में तेरे आकर, बदनाम हो चुके हम

पहला ही जाम भरकर, ऐसा हमे पिलाया

सारी अक्ल हुनर खो, नादान हो चुके हम

बिल्कुल नही रहे अब, दुनिया के काम के कुछ

बस अब तो तेरे दर के, मेहमान हो चुके हम

रहती हवस ये दिल मे, भर भर के जाम पियें

इनकार तुम ना करना, इकरार कर चुके हम

भजन गायक

(मनीष अनेजा जी)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।