अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

इक तेरे तो ही आस है माँ

एह माडे दिन भी कट जान गे तेरे भगता नु विश्वाश है माँ

अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

सुने सुने सब शहर ने अज सुनी सुनी सब गलियां ने

सुना सुना है एह पवन तेरा ना गूंज रही ओथे टलीआ ने

लगदा है तेरे भगता नु जीवे मिलिया होया वनवास है माँ

अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

अज बेबस है संतान तेरे ना कोई सहारा दिसदा है

दुखादी चकी विच फस के इंसान पिआज पिस्दा इ

इक नजर मेहर दी माँ दे तू तेरे चरना विच अरदास है माँ

अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

तू ही ता जगत रचाया इ माँ तू ही पालनहारी ए

हूँ तू ही रक्शा कर जग दी तेरे हथ विच शक्ति सारी ऐ,

हर मुशकिल दा हल कोल तेरे मुशकिल विच तेरा दास है माँ

अज कल दिल बड़ा उदास है माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।