कैसीयां कोरोना ने माँ पाईयां नें दूरीयां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कैसीयां कोरोना ने माँ पाईयां नें दूरीयां

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

कैसीयां कोरोना ने माँ....

जग परेशान तेरा द्वार सुन्ना हो गया

सुखाँ दा खजाना मैया कित्थे जा के खो गया

रह गईयाँ ने दिल दीयाँ सदरां अधूरीयाँ

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

कैसीयां कोरोना ने माँ....

सुन्ना है द्वार तेरा जग परेशान माँ

तेरे इस जग दी है खतरे च जान माँ

तू हैं जानी-जान मैया आसां करे पुरीयाँ

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

कैसीयां कोरोना ने माँ....

कुदरत नु तेरी असी बहुत ही सताया माँ

अपने ही हत्थी घर अपना जलाया माँ

नहियों दोहरावांगे माँ गलतियां गुड़ीयां

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

कैसीयां कोरोना ने माँ....

मोड़ दे तू सारेया दे चेहरेयां ते लाली माँ

रुल जावांगे जे तू वी ममता हटा लई माँ

असी मजबूर तैनु का दी मजबूरीयां

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

कैसीयां कोरोना ने माँ...

कैसीयां कोरोना ने माँ पाईयां नें दूरीयां

ऐस वेले मैया तुहाडी रहमतां ज़रूरीयाँ

जय जय अम्बे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।