एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज,

आधो जासी गळ्या गळ्या आधो इसर न्हासी राज,

ईशर घणा बधावणा बहु गौरल जायो पूत राज,

कानीराम घौड़ी घूघरा बहु लाडल माथा मोर राज,

अलदा ल्यावो परदा ल्यावो बांधन वाळ बंधाओ राज,

सार की सुई ल्यावो बाँट का तो तागा राज,

सींव रै दरजी रा बेटा है भतीजा नागा राज़,

सींवता पोवता दिन दस लाग्या राज ई भुआ के कारणे,

पाठान्तर भुआ लाइ बाग़ा ए भुआ के कारणे,

भतीजा रह गया नागा भतीजा रह गया नागा राज,

नागा नागा काई करो राज और सीवाँ स्या बागा राज,

एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज,

आधो जासी गळ्या गळ्या आधो इसर न्हासी राज

पहरो रे म्हारा भाई भतीजो भुआ ल्याई बागा,

एल खेळ नदी बहवे ओ पाणी कित जासी राज,

आधो जासी गळ्या गळ्या आधो बडोड़ा बीरा जी न्हाय सी,

आधो जासी छोटोडा बीरा जी न्ह्याय सी,

बडोड़ा बीरा जी करया बधावणा भाभ्या जाया पूत जी,

छोटोडा बीरा घोड़ी घुघरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।