नर देहि पायी चित्त चरण कमल दीजै

संत सूरदास
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नर देहि पायी चित्त चरण कमल दीजै,

दीन बचन संतन संग दरस परस कीजै

लीला गुण अमृत रस श्रवणन पुट पीजै,

सुन्दर सुख निरख ध्यान नैन माहि लीजै

गदगद सुर पुलक रोम अंग प्रेम भीजै,

सूरदास गिरिधर जस गाये गाये जीजै

नर देहि पायी चित्त चरण कमल दीजै,

दीन बचन संतन संग दरस परस कीजै

लीला गुण अमृत रस श्रवणन पुट पीजै,

सुन्दर सुख निरख ध्यान नैन माहि लीजै

गदगद सुर पुलक रोम अंग प्रेम भीजै,

सूरदास गिरिधर जस गाये गाये जीजै

नर देहि पायी चित्त चरण कमल दीजै,

दीन बचन संतन संग दरस परस कीजै

लीला गुण अमृत रस श्रवणन पुट पीजै,

सुन्दर सुख निरख ध्यान नैन माहि लीजै

गदगद सुर पुलक रोम अंग प्रेम भीजै,

सूरदास गिरिधर जस गाये गाये जीजै

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।