तेरी यादा विच जींद हो लचार रुल गई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी यादा विच जींद हो लचार रुल गई

काहनू बचेया दी लेनी माँ सार भूल गई

दे ममता दी छा अमडीये फड लै साडी बाह

ऐसे जग ने माँ दिल उते चोटा दितीया जाके किस नु सुनाइये आप बितिया

तू भी औन दा माँ करके करार भूल गई

काहनू बचेया दी लेनी माँ सार भूल गई

दे ममता दी छा अमडीये फड लै साडी बाह

साहणु मिलिया न मोका चरना च रेहन दा

दो घडी तेरी ममता दी छा च बेहन दा,

डोरी प्यार क्यों अध् विच कार खुल गई

काहनू बचेया दी लेनी माँ सार भूल गई

दे ममता दी छा अमडीये फड लै साडी बाह

गल्ला दिल दिया मावा बाजो केह्डा जान दा

मेहरा वाला पल्ला सिर ते न कोई तान दा

तू क्यों अपना ही माये परिवार भूल गई

काहनू बचेया दी लेनी माँ सार भूल गई

दे ममता दी छा अमडीये फड लै साडी बाह

जीवे तिलक अम्बाले वाला दिता तार माँ

साडी सुन के पुकार आजा इक वार माँ

देना कमल नु मावा वाला प्यार भूल गई

काहनू बचेया दी लेनी माँ सार भूल गई

दे ममता दी छा अमडीये फड लै साडी बाह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।