इस दुनिया दा हर सुख जोगी मैं पाया ऐ

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॥ पावन पाठ ॥

मैं जदों दा मन तेरे चरना दे नाल लाया ऐ,

इस दुनिया दा हर सुखी जोगी मैं पाया ऐ,

तेरे चरना दे नाल लग के पाया सुख जोगी

तेरे नाम लवा मेरे मूक जांदे सब दुःख जोगी

मेरी जिन्दगी दा मेरे जोगी तू सरमाया ऐ,

इस दुनिया दा हर सुख जोगी मैं पाया ऐ

मेरी किस्मत ऐसे खेड मेरे नाल खेड़े सी

मंजिल बड़ी दिख्दी दूर ते रस्ते टेड़े सी

तू फड़ेया हथ मेनू सीधे राहे पाया ऐ,

इस दुनिया दा हर सुख जोगी मैं पाया ऐ

तेरा सिफ्ता लिख के अंकिता भी मशहुर होई

इस जाग दे वेहमा भरमा तो दूर होई

तेरी किरपा ने मेरा जग से नाम चमकाया ऐ,

इस दुनिया दा हर सुख जोगी मैं पाया ऐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।