प्रभु का जाप करले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

इस झूठी दुनिया में तू सच केहने का पाप करले

काया तो नश्वर है पगले प्रभु का जाप करले

प्रभु का जाप करले

हरी का जाप किया है देवो ने वेदों ने फरमाया है

बड़े बड़े ऋषि मुनियों ने प्रभु का ही गुण गाया है

जगा तू मन में हरी ईशा गुण गान आप करले

काया तो नश्वर है पगले प्रभु का जाप करले

प्रभु का जाप करले

ऐसा कोई नही है जिस ने कभी न पाप किया हो

ऐसा कोई नही है जो अपने ही लिए जिया न हो

किसी के केहने से नही खुद पश्ताप करले

काया तो नश्वर है पगले प्रभु का जाप करले

प्रभु का जाप करले

सुख में तूने नाम लिया न आई दुःख की बारी है

अपने दता साथ छोड़ गये मनवा दुःख से भारी है

दुखियो के दुःख को अपना थोडा अभिलाप करले

काया तो नश्वर है पगले प्रभु का जाप करले

प्रभु का जाप करले

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।