सारी दई मोपे पर रंग की गगर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सारी डाल दई मोपे रंग की गगर

मैं तो धोखे से देखन लागी उधर

सारी डाल गई मोपे रंग की गगर

मैं तो धोखे से देखन लागी उधर

अबीर गुलाल मलो मुख रोली २

मलो मुख ऊपर मलो मुख ऊपर

अब सुझत नाही आली मोको डगर

मैं तो धोखे से देखन लगी उधर

सारी डाल दई मोपे रंग की गगर

भरि भरि रंग नयन पिचकारी 2

नयन पिचकारी नयन पिचकारी

कभी मरे उधर कभी मरे इधर

मैं तो धोखे से देखन लगी उधर

सारी डाल दई मोपे रंग की गगर

हंस मुस्काय अधर अधर बोले 2

अधर अधर बोले अधर अधर बोले

अब रार करो ना मोसे ढीठ लंगर

मैं तो धोखे से देखन लगी उधर

सारी डाल दई रंग की गगर

बिना होली खेले मैं जाने नहीं दूंगी

मैं जाने नहीं दूंगी मैं जाने नहीं दूंगी

अब हो गई होली गोरी जाओ अपने घर

मैं तो धोखे से देखन लागी उधर

सारी डार दई मोपे पर रंग की गगर

मैं तो धोखे से देखने लागी उधर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।