कैसे उतारू गंगा पार

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार

कैसे गंगा पार , उतारू कैसे गंगा पार

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार…….

आप के बारे में मैंने ये सुन रखा है रघुराई

एक शीला ने आपके चरणों की एक दिन धुली पाई

चरण धूली लगते ही उठ बैठी वो बन के नार

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार…….

आप के चरणों की रज परिवर्तन करने में प्रबल है

मेरी नाव काठ की स्वामी पत्थर से अति कोमल है

उड़ी जो नारी बन के ठप हो मेरा रोजगार

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार…….

सारा दिन मेहनत कर नैया गंगा बीच चलाता हूँ

आने जाने वालों से जो खरी मंजूरी पाता हूँ

उसी से है रघुनंदन चलता मेरा परिवार

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार…….

भूलन त्यागी कहे है राघव चाहे आप बुरा माने

चाहे सीता श्राप देवे बेशक लक्षमण भुकुटी ताने

उतारू फिर गंगा से पहले लू चरण पखार

बिना चरणों के धोये , कैसे उतारू गंगा पार…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।