माये नि मैं तेनु केहना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माये नि मैं तेनु केहना मेरा तेरे उते जोर मेरा दूजा न कोई होर

तेरा फड़ के लड मैया जी अड़ के डर ते रेहना,

माये नि मैं तेनु केहना..

तू ता जानी जान सी माये हाल मेरा क्यों जानेया नी

तेरे बिन न होर कोई मेरा मेनू भी पह्चानेया नी

मेरी किस्मत दी रेखा नु मुड के लिखना पेना

माये नि मैं तेनु केहना.....

बालक अडिया करदे देखे माँ मनाउंदी बाला नु

तू ता ऐसा रूस गई माये पेया मनौना लाला नु

तेरा रोसा सेहा न जाए तेनु मनोना पैना

माये नि मैं तेनु केहना

अपने इक इशारे ते माँ रिधि सीधी नचोनी आ

अख भी न झपके मैया जी जो चावे कर जानी ऐ

हर पल माये घोटे खावा मेनू बचोना पैना

माये नि मैं तेनु केहना

तेरे ता अनमोल खजाने ना मूक दे ना घट दे माँ

सिधिया तो वरताई जावे हथ तेरे न थक दे माँ

भोरा मासा अतुल माँ पूछे झोली विच कद पैना

माये नि मैं तेनु केहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।