मेरे घुंघरू बोले हरे हरे

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे घुंघरू बोले, हरे हरे,

गोविन्द हरे, गोपाल हरे,

जय जय प्रभु दीन दयाल हरे,

जय जय प्रभु दीन दयाल हरे,

मेरे घुंघरू बोले, हरे हरे।

एह घुंघरू मेन्नु सतगुरु दित्ते,

एह घुंघरू मेन्नु सतगुरु दित्ते,

मैं तरले कित्ते बड़े बड़े,

मैं तरले कित्ते बड़े बड़े,

मेरे घुंघरू बोले, हरे हरे..........

मैं नच्चा मेरा गिरधर नच्चे,

मैं नच्चा मेरा गिरधर नच्चे,

मेनू होर भी मस्ती चढ़े चढ़े,

मेरे घुंघरू बोले, हरे हरे,

मेरे घुंघरुं बोले, हरे हरे.........

सुण घँघुरु मेरा देवर लड़दा,

सुण घँघुरु मेरा देवर लडदा,

मेरी सस्सों रहन्दी मेथो परे परे,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे,

मेरा घुंघरुं बोले, हरे हरे...........

उल्टा पुल्टा कई कुछ कहन्दे,

उल्टा पुल्टा कई कुछ कहन्दे,

मेनू बोल सुनावण सड़े सड़े,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे,

मेरा घुंघरुं बोले, हरे हरे..........

छूट जाणे यह महल चौबारे,

छूट जाणे यह महल चौबारे,

एह रह जाने सुख धरे धरे,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे..........

गाले गीत मधुप गिरधर दे,

गाले गीत मधुप गिरधर दे,

अरी सुमिरण विच सुख बड़े बड़े,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे,

मेरा घुंघरू बोले, हरे हरे...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।