छत्र देखती ना माँ चुनरिया देखती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

छत्र देखती ना माँ चुनरिया देखती,

भाव अपने भक्त का मेरी मैया देखती

माँ भला कब किसी का क्या खाये,

सारी दुनिया को वो तो खिलाये,

भाव की माँ की भूखी खाने रूखी सुखी,

छोड़ के भोग छप्पन चली आये,

माँ तो बस खिलने का नजरिया देखती

माँ भला कब किसी से क्या लेती,

वो तो खुद ही ज़माने को देती,

फूल काफी है दो हो अगर भाव तो,

फूल काफी है दो हो अगर भाव तो,

भाव बिन छत्र सोने का ठुकरादेति,

भेट चढ़ावे की ना गहरिया देखती,

भाव अपने भक्त का मेरी मैया देखती

लाख बंगला कोई माँ सजाये,

चौकी चन्दन की चाहे लगाए,

टूटे आसान पे वो बैठे जो भाव हो,

भाव के बिन सिंहासन भी न भावे,

ऊँची हवेली ना माँ झुपड़िया देखती

भाव अपने भक्त का मेरी मैया देखती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।