किथे बैह गया समाधियां लाके

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

किथे बैह गया समाधियां लाके ,

गाऊआं किदे कोल छडियां

धूणा बोड़ा थले बैठा है तपाके

गाउआं किदे कौल छडियां

जंगला च बाबा जी ने मंगल लगा लेया

फेर फेर माला रंग नाम दा चड़ा लेया

कैहन्दा उठना मैं दर्शन पाके

गाउआं किदे कौल छडियां

उम्र नियाणी लगे जोगी रूप रब दा

लाके ध्यान बैठा शिवा नू है लभदा

लाईआ लकड़ा भी धूने च सजाके

गाउआं किदे कौल छडियां

भगत मदन कैहन्दा ऐहो धूमा पै गईआं

चरके जो आईयां गाउआ धूणे कौल बैह गईआ

जिम्मे बन जांदा कोई है लियाके

गाउआं किदे कौल छडियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।