जय जय जय श्री कृष्ण मुरारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जय जय जय श्री कृष्ण मुरारी

जय जय जय श्री कृष्ण मुरारी,

सुमिरत मिटत लोभ मद तृष्णा,

राग द्वेष भव भय तम सारी,

जय जय जय......

जय पाप विनाशक धरणी नायक,

कृपा सरोवर मुरलीधारी,

जय जय जय........

जय करुणा सागर सब गुण आगर,

ब्रज भूषण पीताम्बर धारी,

जय जय जय .........

जय रास रचैया कृष्ण कन्हैया,

राधा बल्लभ बिपिन बिहारी,

जय जय जय........

जय रणधीर महा बलवीर,

कालिय मर्दन गिरिधारी,

जय जय जय ........

जय प्रिया प्रियतम राधा माधव,

रास रासेश्वर छैल बिहारी,

जय जय जय...............

रचना आभार: ज्योति नारायण पाठक

वाराणसी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।