तेरे भवनों जैसा कोई भी द्वारा नही देखा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे भवनों जैसा कोई भी द्वारा नही देखा

द्वारे बड़े देखे द्वारे बड़े देखे

माँ की किरपा जैसा कोई भी सहारा नही देखा

सहारे बड़े देखे सहारे बड़े देखे

अपने भी देखे बेगाने भी देखे

झूठे सब प्रेम के दीवाने भी देखे

दर्द भी देखा देने वाले भी देखे

दुनिया के जलवे निराले भी देखे

जग देखा अंत ये जाना

तेरे ध्यानु जैसा कोई भी प्यारा नही देखा

प्यारे बड़े देखे प्यारे बड़े देखे

तेरे भवनों जैसा कोई भी द्वारा नही देखा

हमरी न मानो इन भगतो से पूछो

भगतो से पूछो इन संतो से पूछो,

जंगलो से पूछो पहाड़ो से पूछो

पापो से पूछो बहारो से पूछो

बड़ा तेरा भवन प्यारा

चमका भगतो जैसा कोई भी सितारा नही देखा

सितारे बड़े देखे सितारे बड़े देखे

तेरे भवनों जैसा कोई भी द्वारा नही देखा

मुझको भी अपनी माँ भगती का वर दो

मुझपे भी नजरे कर्म अपना करदो

तेरे सिवा मेरा और न कोई,

गोद राज की है यही अर्जोई

गोद में अपनी बिठाना बिठाना

तेरी बाहों जैसा कोई भी हुलारा नही देखा

हुलारे बड़े देखे हुलारे बड़े देखे

तेरे भवनों जैसा कोई भी द्वारा नही देखा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।