गुरु में संसार समाया उनका है आशीष पाया

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु में संसार समाया उनका है आशीष पाया,

प्रभु ने खुद से भी ऊँचा गुरु का है स्थान बताया,

ये गुरुवर तो ज्ञान के सागर है इनसे ही जन्नत है,

ये गुरुवर तो ज्ञान के सागर है इनसे ही जन्नत है,

गुरु रत्नाकर सूरी जी है हम सबके तारणहारे,

सबकी जीवन नैया को देते है वो किनारे,

57 साल उन्होंने है ज्ञान का अमृत बांटा,

अब उनके जन्मदिवस पर हम सबका है ये वादा,

जो सीखा है उसे अपनाएंगे खुशियों को पाएंगे,

ये गुरुवर तो ज्ञान के सागर है.....

रानीवाड़ा के हर घर में खुशियों का समां है छाया,

संगे मुकेश ने भभूतमल जी का सपना सच है बनाया,

गुरु है शीतल चंदा से सागर से गहरे ज्ञानी,

प्रभु को हमने ना देखा बस इनकी कही है मानी,

ये बोकड़िया परिवार धन्य हुआ गुरुवर से नाता जुड़ा,

ये गुरुवर तो ज्ञान के सागर है....

गुरु में संसार समाया उनका है आशीष पाया,

प्रभु ने खुद से भी ऊँचा गुरु का है स्थान बताया,

ये गुरुवर तो ज्ञान के सागर है इनसे ही जन्नत है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।