बरसा पारस सुख बरसा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

बरसा पारस सुख बरसा,

आंगन आंगन सुख बरसा

चुन चुन कांटे नफरत के,

प्यार अमन के फूल खिला…

बरसा पारस..

द्वेष–भाव को मिटा,

इस सकल संसार से,

तेरा नित सुमिरन करें,

मिल–जुल सारे प्यार से,

मानव से मानव हो ना जुदा…

आंगन आंगन सुख बरसा

बरसा पारस, सुख बरसा

झोलियां सभी की तु,

रहमों–करम से भर भी दे,

पीर–पर्वत हो गयी,

अब तो कृपा कर भी दे,

मांगे तुझसे ये ही दुआ…

आंगन आंगन सुख बरसा

बरसा पारस, सुख बरसा

कोई मन से है दुखी,

कोई तन से है दुखी,

हे प्रभु ऐसा करो,

कुल जहान हो सुखी,

सुखमय जीवन सबका सदा…

बरसा पारस..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।