रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

मुरली बजाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

लेकर संग में सखी सहेली

बन कर के मैं नई नवेली

ओह्ड़े चुनरिया लाल छमा छम नाचू गी

रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

मुरली बजाओ नन्द लाल

जोडू हाथ पडू तोरे पईया ले चल मुझको कदम की छईया

मिला ताल से ताल छमा छम नाचू गी

रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

मुरली बजाओ नन्द लाल

चडी रास की मुझे खुमारी गाये ज्योति लिखे अनाडी

नए नए शब्द कमाल छमा छम नाचू गी

रास रचाओ नन्द लाल छमा छम नाचू गी

मुरली बजाओ नन्द लाल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।