भोले दी बरात चली,

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले दी बरात चली,

गज वाज के,

सारीया ने भंग पीती राज राज के

हो सारीया ने सारीया ने

सारीया ने सारीया ने

सारीया ने भगत प्यारिया ने

ब्रह्मा विष्णु ख़ुशी मांदे,

देवी देव जय कारे लौंदे,

बन के बाराती आये सज धज के,

सारीया ने भंग पीती....

भोले वखरा रूप बनया,

गौर मैया नाल बयाह रचाया,

देखनु ने आये सारी भज भज के,

सारीया ने भंग पीती......

राजू वीर हरिपुरिये गाणी,

महिमा शिव दी कही ना शिवानी,

साज भी ना थके बज बज के,

सारीया ने भंग पीती.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।