नाकोड़ा रा नाथ भेरूजी रुणझुण करता आओ

पारंपरिक
महादेव भजन जैन भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नाकोड़ा रा नाथ भेरूजी रुणझुण करता आओ

आओ भेरूजी आओ भेरूजी

नाकोड़ा थी आओ

एक हाथ में त्रिशूलधारी

डम डम डमरू बजाओ

दूजे हाथ में खड़ग धराजो

रुणझुण घुँघरा बजाओ

कलाकंद सुखड़ी है प्यारी

छप्पन भोग लगाओ

तेल चढ़ाऊँ नित रविवारी

श्रीफल चरणे धराओ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।