मैं तो तीरथ करने आई बाहुबली के चरणों में आई

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॥ पावन पाठ ॥

मैं तो तीरथ करने आई बाहुबली के चरणों में आई,

मेरा बेड़ा लगा दो पार प्रभु जी आई हूं तेरे द्वार,

आई है गुड़िया दर के लायी है लुटिया भर के,

मैं भी नभन करा लूँ प्रभु जी,

मैं तो दूर से चलके आई तेरे दर्शन करने आई,

मेरा बेड़ा लगा दो पार प्रभु जी आई हूं तेरे द्वार

मैं तो तीरथ करने आई बाहुबली चरणों में आई।।

मैं दुनियाँ छोड़ के आई मैं पिंजरा तोड़ के आई,

तुम्हीं हो तारण हारी प्रभु जी,

मैं तो अभिषेक करवाऊं पापी कर्मों को छुड़ाउ,

मेरा बेड़ा लगा दो पार प्रभु जी आई हूं तेरे द्वार

मैं तो तीरथ करने आई बाहुबली चरणों में आई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।