पीवजी मन मत करजो उदास सदा तुम हासी न रहजो जी

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॥ पावन पाठ ॥

पीवजी मन मत करजो उदास ,

सदा तुम हासी न रहजो जी ।

म्हारा मन म खुशी की बड़ी आस ,

सदा तुम हासी न रहजो जी ।

सूरत तुम्हारी दूर बस म्हारा पिवजी ,

न मुरती छे म्हारा पास

मन मंदिर में दीपक जलता ,

वामे करजो वास

सदा तुम हासी न रहजो ज

सुदामा घर का तांदूल खाया ,

न खाया भिलनी का बेर

विदुर घर की साग खाई

राखी अबला की टेर

सदा तुम हांसी न रहजो जी

कामधेनु की लेण ख परीक्षा

वन म बणी गया शेर

पावन कुंड म अमरीत बणीगा

उतारयो भीम को जहर

सदा तुम हांसी न रह जो जी

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।