हाथ करताल तंबूरो बजाई रई

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॥ पावन पाठ ॥

हाथ करताल तंबूरो बजाई रई ,

साधु न की संग म मीरा भजन करी रई

माथा की बिंदिया महल म भूली आई ,

महल म भूली आई , महल म भूली आई ,

चंदन लगाई न माथा ख सजाई रई ,

साधु न की संग म मीरा भजन करी रई ।

नवलख माला महल म भूली आई ,

महल म भूली आई , महल म भूली आई ,

तुलसी की माला गला म सजाई रई ,

साधु न की संग म मीरा भजन करी रई ।

पांव की पायल महल म भूली आई ,

महल म भूली आई , महल म भूली आई ,

घुंघरू बांधी न पांव सजाई राई ,

साधु न की संग मीरा भजन करी रई ।

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।