भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

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॥ पावन पाठ ॥

भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

गुरुजी म्हारी नाव गुरुजी म्हारी नाव

भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

नही है म्हारा कुटुंब कबीला

नही म्हारो परिवार

आप बीना दूजो नही सूझे

आप ही खेवनहार

भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

भवसागर तो ऊंडो घणों है

किस विधि उतरु पार

निगाह करू तो नजर नहीं आवे

भवसागर की थाह

भरोसे थारे चाले हो गुरुजी म्हारी नाव

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।