सुनेहरीया जटावा वालेया

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

एक सिफ़ट करा मैं जोगी तेरी सुनेहरीया जटावा वालेया

आके भगता दे घर पाजा फेरी सुनेहरीया जटावा वालेया

आजा सोने दी गुफा नु बाबा छड के

कर नेड़े दाता झोली बैठा अड़ के

होनी भगता ते किरपा तेरी

सुनेहरीया जटावा वालेया

लीला पौन्हारी तेरिया न्यारियाँ

गाऊआ वाले सब रतनो दीया चारिया

चारे युगा वाला शिवा वाली मेरी

सुनेहरीया जटावा वालेया

भेटा चरना च वालिया गावदा,

मैं ते भूल के न दिल चो विसारदा

लिखी राम जी ने सिफत ऐ तेरी

सुनेहरीया जटावा वालेया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।