सोहम बाला हलरों नित निर्मलो

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सोहम बाला हलरों नित निर्मलो , निर्मल थारी ज्योत

नदी सूक्ता के घाट पे , बैठयो ध्यान लगाय

आवत देखयों पिंजरो , लियो गोद उठाय

सप्त धातु को यो पिंजरो , पाठ्या तीन सौ साठ

एक-एक कड़ी हो जडाव की , जा पर रचियों ठाट

आकाश झूलना बांधिया , लगया निर्गुणी डोर

जुगति से झूला झुलवाजों झूले मनरंग मोर

नहीं रे बालो यो सोवतो नहीं जागतों, बिन ब्याही को पूत

सदा हो शिव जाके संग रहे , खेले बांझ को पूत

अनहद घुघरू बांधिया अजपा का हो मेल

अष्ट्र कमल दल फुली रहया जहां बिन बरसात

सुखमना दोई हिलमिल रहे सोना साकल डोर

ब्रम्हगिर कहता भया काया का हो डोल

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।