मैया अमरकंट वाली तुम हो मा भोली भाली

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॥ पावन पाठ ॥

मैया अमरकंट वाली तुम हो मा भोली भाली

तेरे गुण गाते है साधु मा बजा बजा के ताली

भूरे मगर पर कीन्ही सवारी हाथ कमल का फूल

सबको देती रिद्धि सिद्धि हमे गई क्यो भूल

नही हमारा कुटुम कबीला नही मात और तात

हम तो आए शरण तिहारी शरण पड़े की लाज

निर्धनियो को धन देती मा अज्ञानी को ज्ञान

अभिमानी का मान मिटाती खोती नाम निशान

लाखी पापी तुमने तारे लगी ना पल की देर

अब तो मैया मेरी बारी ई कहा लगाई देर

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।