नावड्या रे नाव म्हारी रे संभाल

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॥ पावन पाठ ॥

नावड्या रे नाव म्हारी रे संभाल

नई तो भवसागर म डूबी जायग

भवसागर में डोल रही नैया

तुम बिना म्हारो कोण छे खिवैया

नावड्या रे नही मिलतो किनार

नई तो भवसागर म डूबी जायग

भवसागर की कठिन या धारा

लहर सताय रही बारमबारा

नावड्या रे वेग बढ़तो अपार

नई तो भवसागर म डूबी जायग

नाव पुराणी नदी गहराणी

घड़ी-घड़ी पल-पल बढ़ी रहयो पाणी

नावड्या रे मख पार रे उतार

नई तो भवसागर म डूबी जायग

दास की नैया शरण तुम्हारा

आई न लगई देवो आज किनारा

नावड्या रे नाव चरण आधार

नई तो भवसागर म डूबी जायग

प्रेषक प्रमोद पटेल

यूट्यूब पर

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।