अहो मेरे सिर पर सिंगा जबरा

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॥ पावन पाठ ॥

अहो मेरे सिर पर सिंगा जबरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

गुरू मैं सदा करत हु मुजरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

अंतः करण की तुम ही जाणों

अंतः करण की तुम ही जाणों

अहो गुरू तुम कारण मैं उबरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

जहाजवान ने तुमको सुमरा

जहाजवान ने तुमको सुमरा

अहो गुरू डूबती जहाज लई उबरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

झाबुआ देश भादरसिंग राजा

झाबुआ देश भादरसिंग राजा

अहो गुरू उनने तुमको सुमरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

राजपाठ कुल छत्तर धरिया

राजपाठ कुल छत्तर धरिया

अहो खेलावण दिया कुमरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

देवझिरी की मोटी महिमा

देवझिरी की मोटी महिमा

अरे वहा मेला जुड़ी रहया गहरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

कहे जण दल्लू सुनो भाई साधो

कहे जण दल्लू सुनो भाई साधो

अहो गुरू राखो चरण के हजरा

मेरे सिर पर सिंगा जबरा

प्रेषक प्रमोद पटेल

यूट्यूब पर

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।