कर भजन हर श्वास रे मन तू

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॥ पावन पाठ ॥

कर भजन हर श्वास रे मन तू , कर भजन हर श्वास रे

हो थारो जीवन बणग बड़ो खास रे , मन तू कर भजन हर श्वास रे

लख चौरासी का फेरा जो खायो

जब जाई न तुन नर तन पायो

आयो अवसर थारा पास रे

मन तू कर भजन हर श्वास रे

पांच तत्व की या काया बणाई

तिन गुण की एम डोर लगाई

अब कर भजन की आस रे

मन तू कर भजन हर श्वास रे

नाम बिना तो थारो कोई नी संगाति

या माया तो भाई आती जाती

नही रहण की थारा पास रे

मन तू कर भजन हर श्वास रे

प्रेषक प्रमोद पटेल

यूट्यूब पर

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।