मोको लाग्यो रे सतसंगी थारो भाग जाग्यो रे

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॥ पावन पाठ ॥

मोको लाग्यो रे सतसंगी ,

थारो भाग जाग्यो रे मौको लाग्यों रे

गली गली हरी चर्चा होवे ,

जाणो सतगुरु आयो रे ,

भारत भूमि अमरत बरसे ,

बहुत ही आनन्द छायो रे ,

मोको लाग्यो रे सतसंगी ,

थारो भाग जागयो रे ,

मौको लाग्यों रे ।

देश देश का हरी जन आया ,

भारी मेलो लाग्यो रे ,

मुक्ति का दरवाजा खुली गया ,

अब तो कलयुग भाग्यो रे ,

मोको लाग्यो रे सतसंगी ,

थारो भाग जागयो रे ,

मौको लाग्यों रे ।

भूल्या भटक्या जीव जो आया ,

अब तो अवसर आयो रे ,

तीरथ बरत तो सब ही करिया ,

अब तो गंगा नहाओ रे ,

मोको लाग्यो रे सतसंगी ,

थारो भाग जागयो रे ,

मौको लाग्यों रे ।

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।