झिलमिल ज्योत झलक रया मोती आरती

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झिलमिल ज्योत झलक रया मोती

पारी ब्रम्ह निरंजन आरती

काहे करू दिवलो न काहे करू बाती

आसी कायन ज्योत जले हो दिनराती

पारिब्रम्ह निरंजन आरती

तन करू दिवलो न मन करू बाती

सोहम ज्योत जलहू दिनराति

पारिब्रम्ह निरंजन आरती

धरती आकाश उमड़ गया बादल

डाल मुल नही फूल न पाती

पारिब्रम्ह निरंजन आरती

कंचन थाल कपूर की बाती

अखंड ज्योत जलहु दिनराती

पारिब्रम्ह निरंजन आरती

कहे मनरंग आगम की या वाणी

आसी या आरती तीनो लोक म फिरती

पारिब्रम्ह निरंजन आरती

प्रेषक प्रमोद पटेल

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।