सदा तुम आनंदे मूर्ति आरती

पारंपरिक
सूर्य देव आरती विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

सदा तुम आनंदे मूर्ति

हो सदा तुम आनंदे मूर्ति

सत्य धर्म परमाण

अनुभव की आरती

जय देव जय गुरुदेव

काया कंचन थाल

जिसमे पांच पच्चीस बाती

मन दिवला लगी ज्योत

बिन तेलो बाती

जय देव जय गुरुदेव

घंटा बाजे अनहद नाद

सूरत निरत जहा रहे लिपटी

गगनो में झनकार रचना है मोटी

जय देव जय गुरुदेव

अष्ट कमल परकाश

आत्मा झलके रवि हो शशि

भवर गुफा निज धाम

धारा बह उलटी

जय देव जय गुरुदेव

किजो अमीरस पान

स्नान कीजो नित हो उठी

छः सौ इक्कीस हजार

बिन किरभा की

जय देव जय गुरुदेव

अष्ट पहर दिन रेन

शिव रचना मोटी

हो रामा सोहम रचना मोटी

यो भेद विरला जाने

बाबा ब्रम्हगीर करे आरती

जय देव जय गुरुदेव

प्रेषक प्रमोद पटेल

यूट्यूब पर

1.निमाड़ी भजन संग्रह

2.प्रमोद पटेल सा रे गा मा पा

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।