माया का लोभी मत कर अभिमान

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॥ पावन पाठ ॥

माया का लोभी मत कर अभिमान

मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया रे जसी तरुवर की छाया

या माया को पार नी पाया

कभी लग छाव भैया कभी लग घाम

मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया म जो उलझाया

जो पड़या फंद एका खूब पछताया

पड़ दुख भारी फिर रोव सुबह शाम

मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

या माया छे जगत ठगोरी

रावण न सीता ख चोरी

मिटी गयो जेको भाई नामो रे निशान

मिल्यो अवसर तुख भज हरी नाम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।