हारे का सहारा है कश्ती का किनारा है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हारे का सहारा है, कश्ती का किनारा है

मेरे श्याम तुम बिन नहीं, जीवन का गुज़ारा है

अपनों ने ठुकराया, कोई ना नजर आया

अश्को की सुनी फरियाद, तू दौड़ा है आया

मेरी किस्मत का श्यामा, चमकाए सितारा है

मेरे श्याम तुम बिन नहीं जीवन का गुज़ारा है

खुशियों की माला के, बिखरे मोती सारे

चुन कर हर इक मोती, बाबा ने ही संवारे

रहमत का चारो ओर, अब दिखता नज़ारा है

मेरे श्याम तुम बिन नहीं जीवन का गुज़ारा है

मौजो की ना थी तरंग, जीने की ना थी उमंग

सतरंगी दुनिया में, ये जीवन था बेरंग

कीर्ति को पग-पग पे, तूने ही संभाला है

मेरे श्याम तुम बिन नहीं, जीवन का गुज़ारा है

हारे का सहारा है कश्ती का किनारा है

मेरे श्याम तुम बिन नहीं जीवन का गुज़ारा है

Writer- Kirti Pahuja

9340721316

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।