क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अनूप जलोटा
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

धो डालो तन की चादर को,

लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

क्षमा करो..

तुम तो प्रभुजी मानसरोवर,

अमृत जल से भरे हुए

पारस तुम हो, इक लोहा मै,

कंचन होवे जो ही छुवे

तज के जग की सारी माया,

तुमसे कर लू मै अनुराग

धो डालो तन की चादर को,

लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

क्षमा करो..

काम क्रोध में फंसा रहा मन,

सच्ची डगर नहीं जानी

लोभ मोह मद में रहकर प्रभु,

कर डाली मनमानी

मनमानी में दिशा गलत लें,

पंहुचा वहां जहाँ है आग

धो डालो तन की चादर को,

लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

क्षमा करो..

इस सुन्दर तन की रचना कर,

तुमने जो उपकार किया

हमने उस सुन्दर तन पर प्रभु,

अपराधो का भार दिया

नारायण अब शरण तुम्हारे,

तुमसे प्रीत होये निज राग

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

क्षमा करो तुम मेरे प्रभुजी,

अब तक के सारे अपराध

धो डालो तन की चादर को,

लगे है उसमे जो भी दाग

क्षमा करो, क्षमा करो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।