धीरे धीरे अखियाँ माँ खोल रही है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

धीरे धीरे अखियाँ माँ खोल रही है

लगता है मैया कुछ बोल रही है

दुनिया के नजारे तो बेजान लगते

सूरज चंदा कोडी के समान लगते,

आत्मा में अमिरत ढोल रही है

लगता है मैया कुछ बोल रही है

आये गी जरुर मैया आज सामने अपने भगतो का देखो हाथ थामने,

बस मिलने का मोका ये टटोल रही है

लगता है मैया कुछ बोल रही है

बन वारी ऐसी तकदीर चाहे आत्मा में ऐसी तस्वीर चाहिए

ऐसा ये असर दिल पे छोड़ रही है

लगता है मैया कुछ बोल रही है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।