मैं तो अमर चुनड़ी ओढ़ूँ

मीरा बाई
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मीरा जनमी मेड़ते, वा परणाई चित्तोड़,

राम भजन प्रताप सूं सकल श्रृष्टि शिर मोड़,

जगत में सारा जाणी आगे भई अनेक,

कई बायां कई राणी,

जिनकी रीत सगराम कहे है बैकुण्ठा ठौड़,

धरती माता नो वालो पैहरू घाघरो,

में तो अमर, चुनड़ी ओढ़ूँ,

में तो संतो रे भेळी रहवू,

में तो बाबो रे भेळी रहवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी।

चाँद सूरज मारे आंगणे लगाऊ,

में तो झरणा रो झांझर पहरु,

मैं तो संतो रे भेळी रेवु ,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी।

ज्ञानी ध्यानी रे, बगल में राखूं,

हनुमान वालो, कांकण पहरुं,

मैं तो संतो रे भेळी रेवु ,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी।

नवलख तारा, म्हारे आंगणे लगाऊँ,

में तो चरना रो ,जाँजर पहरुं,

मैं तो संतो रे भेळी रेवु ,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी।

पारस ने सरहद कर राखूं,

में तो डूंगर डोडी में खेलूं,

मैं तो संतो रे भेळी रहवू,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी।

नवकाले नाग म्हारे चोटले बंधाऊ,

जद म्हारो माथो गुथाऊँ,

मैं तो संतो रे भेळी रेवु ,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी

दोई कर जोड़ मीरा बाई बोले,

में तो गुण गोविन्द रा गाउँ,

मैं तो संतो रे भेळी रेवु ,

मैं तो बाबो रे भेळी रेवू,

मैं आदि पुरुष री चेली जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।