नच नच के दर तेरे ते कमली हो गई माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नाम तेरे दी मस्ती दे विच एहदा खो गई माँ

नच नच के दर तेरे ते कमली हो गई माँ

कमली कमली केह के सारी दुनिया हसदी ऐ

तेरी प्यारी मूरत मेरे दिल विच वसदी ऐ

ज्योत जगा के तेरी ही ज्योति विच खो गई माँ

नच नच के दर तेरे ते कमली हो गई माँ

सुबह सवेरे उठ के तेरा नाम ध्योनी आ

सचे मन नाल माँ तेरी ज्योत जगाऊनी आ

चरनी ला लिया भगता नु तेरी रेहमत हो गई माँ

नच नच के दर तेरे ते कमली हो गई माँ

गंद्दी भीकी वाला तेरा नाम ध्याओनदा ऐ

विपन भी ता मैया जी गुण तेरे गाउंदा ऐ

चारे पासे तेरी जय जय कार हो गई माँ

नच नच के दर तेरे ते कमली हो गई माँ

Singer bipan ganddi

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।