ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

जय काली जय जय माँ जय काली

तू काली कलकते वाली जय काली जयकाली काली

तेरे गले में मुंडन की माला,

संग भेरो और बजरंग बाला,

जिस ने भी आस लगाई है माँ बिगड़ी पल में बनाई है

ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

जब भीड़ पड़ी थी भगतो पर

भगतो ने तुम्हे पुकारा था,

तब आकर मेरी काली माँ तूने भगतो को पार उतारा था,

ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

तूने दुष्टों का संगार किया

भगतो का बेडा पार किया

जब कोई विपदा आती है माँ दोडी दोडी आती है

ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

तू ही चामुंडा तू ही ज्वाला माँ

तेरा अद्भुत रूप निराला माँ

कोमल पे किरपा करदो माँ सोनिया के संकट हर लो माँ

ना कोई चिंता ना कोई भय कालका माई तेरी सदा ही जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।