कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

है वो कैसा नगर लागे कठिन डगर

मैया दर्शन दे दर्शन दे

कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

तेरा ठिकाना न जाने हम सिर्फ सुने तेरा नाम हो

ऐसी दया कर दो माँ हम पे जा पोंचे तेरे धाम हो

हे मेरी मैया कुल की देवी सिद्ध करो सब काम हो

भोले भाले बेटो को माँ लेलो रे खबरियां

है वो कैसा नगर लागे कठिन डगर

मैया दर्शन दे दर्शन दे

कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

दुनिया में मैंने पाया न कुछ भी बस चाहता हु तेरा प्यार हो

किस को बताऊ किस को सुनाऊ माँ सब की तुम्ही सरकार हो

हे जग्जनीमेरी माँ भवानी हर पल भजु तेरा नाम

प्यार का ये आंचल बेटो से न छूडयो

है वो कैसा नगर लागे कठिन डगर

मैया दर्शन दे दर्शन दे

कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

पूजा की भीधि न जाने हम माँ बालक हम नादान है

भूल चुक मेरी माफ़ करो माँ दो चरणों में अस्थान हो

आनंद को माँ गले से लगा कर

कर दो भव कल्याण हो

भोली भाली मैया थोड़ी डालो तो नजरिया

है वो कैसा नगर लागे कठिन डगर

मैया दर्शन दे दर्शन दे

कौन दिशा में तेरी जीण नगरिया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।