मैं हक़ से कहती हूँ बाबा मेरा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हक से कहती हूँ,

मैं हक से कहती हूँ बाबा मेरा है,

मुझे पग पग पे वो, देता सहारा है,

जब जब मैंने इसका नाम लिया,

लाल लंगोटे वाले ने थाम लिया है,

मैं हक़ से कहती हूँ बाबा मेरा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है।

कहने को तो यूँ सारे ही अपने हैं,

तेरी वजह से पूरे हुए हर सपने हैं,

जो कुछ है पास मेरे, वो सब तो तुम्हारा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है,

जब जब मैंने इसका नाम लिया,

लाल लंगोटे वाले ने थाम लिया है,

मैं हक़ से कहती हूँ बाबा मेरा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है।

हारे हुए को हर कोई बहलाता है,

केवल तू ही उनका साथ निभाता है,

जो थाम लिया तूने ,

कभी ना वो हारा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है,

जब जब मैंने इसका नाम लिया,

लाल लंगोटे वाले ने थाम लिया है,

मैं हक़ से कहती हूँ बाबा मेरा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है।

बाबुल जैसा मुझको तुमसे प्यार मिला,

मुझको समझने वाला,

कोई हक़दार मिला,

मेरे इस जीवन को,

तुम्ही ने सँवारा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है,

जब जब मैंने इसका नाम लिया,

लाल लंगोटे वाले ने थाम लिया है,

मैं हक़ से कहती हूँ बाबा मेरा है,

मुझे पग पग पे वो देता सहारा है।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।