ना मैं धन चाहूँ, ना रतन चाहूँ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन राम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ना मैं धन चाहूँ, ना रतन चाहूँ

ना मैं धन चाहूँ, ना रतन चाहूँ

तेरे चरणों की धूल मिल जाए,

तेरे चरणों की धूल मिल जाए

तो मैं तर जाऊँ, श्याम तर जाऊँ,

हे राम तर जाऊँ

मोह मन मोहे लोभ ललचाए

मोह मन मोहे लोभ ललचाए

कैसे कैसे ये नाग लहराए

कैसे कैसे ये नाग लहराए

इस से पहले की दिल उधर जाए

मैं तो मर जाऊँ, क्यों ना मर जाऊँ

ना मैं धन चाहूँ, ना रतन चाहूँ

लाए क्या थे जो ले के जाना है

लाए क्या थे जो ले के जाना है

नेक दिल ही तेरा खज़ाना है

नेक दिल ही तेरा खज़ाना है

सांझ होते ही पंछी आ जाए

अब तो घर जाऊँ, अपने घर जाऊँ

तेरे चरणों की धूल मिल जाए

तो मैं तर जाऊँ, श्याम तर जाऊँ,

हे राम तर जाऊँ

थम गया पानी, जम गई काई

थम गया पानी, जम गई काई

बहती नदिया ही साफ़ कहलाई

बहती नदिया ही साफ़ कहलाई

मेरे दिल ने ही जाल फैलाए

अब किधर जाऊँ, मैं किधर जाऊँ

अब किधर जाऊँ, मैं किधर जाऊँ

अब किधर जाऊँ, मैं किधर जाऊँ

ना मैं धन चाहूँ, ना रतन चाहूँ

तेरे चरणों की धूल मिल जाए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।